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विश्व आदिवासी दिवस: ट्राइबल समुदाय से निकले वे खिलाड़ी जिन्होंने सफलता का नया इतिहास लिखा है

आज विश्व ट्राइबल दिवस है। ट्राइबल वे होते हैं जो शहरों से दूर पहाड़ों या फिर निर्जन स्थानों में एक छोटे से समूह में रहते हैं। उनका शहरी जीवन के साथ कोई वास्ता नहीं होता । उनकी अपनी जीवनशैली होती है और वे उसमें खुश रहते हैं। उनकी अपनी ज़मीन, जंगल, पहाड़ ही दुनिया होती है।

लेकिन जैसे जैसे वक़्त बीत रहा है और विकास की रौशनी हर तरफ फैल रही है तो उस विकास की रौशनी से ट्राइबल समुदाय भी अछूता नहीं रहा है। वे भी अब धीरे धीरे समाज के मुख्य धारा में शामिल हो रहे है और अपने समुदाय के साथ साथ सम्पूर्ण विश्व के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। भारत भी एक ऐसा देश है जहां लाखों की संख्या में जनजातीय समूह निवास करता है। भारत में ओड़िशा, झारखंड, मध्यप्रेदश, छत्तीसगढ़, गुजरात तथा महाराष्ट्र के कुछ भागों के अलावा नार्थ ईस्ट में काफी ट्राइबल रहते हैं।

पहाड़ों और जंगलों में रहने वाले ये जनजातीय समूह अब सरकारों के प्रयासों के कारण धीरे धीरे जीवन की मुख्य धारा में जुड़ रहे हैं। हालांकि इनकी ज़िन्दगी में आज भी परेशानियां कम नहीं हैं । ज़िन्दगी जीने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं का अभाव इन्हें झेलना पड़ता है।

लेकिन कहा जाता है कि अभाव में ही भाव का जन्म होता है। अभाव आपको सपने देखने से नहीं रोक सकता। अभाव आपको आपके सपने के रास्तों में बाधाएं जरूर उत्पन्न कर सकता है लेकिन आपको आपके सपने पाने से रोक नहीं सकता।

आज विश्व ट्राइबल दिवस के मौके पर हम उन चार भारतीय खिलाड़ियों के बारे में जानेंगे, जो ट्राइबल समुदाय से आते हैं और जिन्होंने जीवन में आनेवाली तमाम बाधाओं को पार करते हुए न सिर्फ अपना और अपने समुदाय का बल्कि पूरे विश्व में भारत का नाम गर्व से ऊंचा किया हैं-

मैरीकॉम

मैरीकॉम बॉक्सिंग में 6 बार विश्व चैंपियन रह चुकी हैं।
भारतीय महिला बॉक्सर मैरीकॉम

1 मार्च 1983 को मणिपुर के एक गरीब किसान परिवार में जन्मी मैरीकॉम आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ महिला बॉक्सर हैं। मैरीकॉम ने भारत को ओलंपिक में कांस्य पदक के साथ-साथ एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्डमेडल दिलवाया हैं। वे बॉक्सिंग में छः बार विश्व चैंपियन रही हैं। बॉक्सिंग में उनके असाधारण प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार, राजीव गाँधी खेल रत्न के साथ साथ पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे नागरिक पुरस्कारों से नवाजा है। वे फिलहाल राज्यसभा की सदस्य हैं और पूरे मनोयोग के साथ अगली बॉक्सिंग प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन का इंतजार कर रही हैं ।

बाइचुंग भूटिया

भारतीय फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया
भारतीय फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया

भारत में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने के श्रेय अगर किसी खिलाड़ी को जाता है तो वो है बाइचुंग भूटिया। भूटिया को फुटबॉल के क्षेत्र में एक टॉर्च बियरर खिलाड़ी के तौर पर जाना जाता है। 15 दिसंबर 1976 को सिक्किम के एक किसान परिवार में जन्मे भूटिया ने भारतीय फ़ुटबॉल को एक नई दिशा दी है।

1995 में अपनी अंतराष्ट्रीय खेल यात्रा शुरू करने वाले भूटिया ने भारत के लिए 82 मैचों में 27 गोल किए हैं । भूटिया ने भारत को सैफ चैम्पियनशिप (1997, 1999, 2005), नेहरू कप (2007, 2009) और एएफसी चैलेंज (2008) जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इसके अलावा वे भारत के कई बड़े फुटबॉल क्लबों के साथ स्टार खिलाड़ी के रूप में जुड़े थे। भूटिया ऐसे पहले भारतीय फुटबॉलर हैं जिन्होंने यूरोप के क्लब के साथ 1999 में प्रोफेशनल तौर पे करार किया था।

भूटिया ने 2011 में अंतराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास ले लिया था। फुटबॉल के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया गया हैं। संन्यास के बाद भी बाइचुंग भूटिया की लोकप्रियता में कमी नहीं आई है। वे अब अपने अकेडमी के माध्यम से नए और बेहतरीन फुटबॉलरों को तराशने का काम कर रहे हैं।

दीपिका कुमारी

भारतीय तीरंदाज दीपिका कुमारी
भारतीय तीरंदाज दीपिका कुमारी

ट्राइबल समुदाय से संबंध रखने वाली दीपिका कुमारी वर्तमान समय में विश्व की सर्वश्रेष्ठ तीरंदाज (Archery) हैं। 13 जून 1994 को झारखंड की राजधानी रांची में जन्मी दीपिका ने भारत को आर्चरी में अनेकों बार मुस्कुराने का अवसर दिया है।

दीपिका ने आर्चरी विश्वकप (2012, 2018) में दो बार स्वर्ण पदक, वर्ल्ड चैंपियनशिप ( 2011, 2015) में सिल्वर, कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में गोल्ड, एशियन आर्चरी 2013 में गोल्ड जीता हैं। दीपिका विश्व की नम्बर एक आर्चर भी रह चुकी हैं। उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। हाल ही में दीपिका परिणय सूत्र में बंधी हैं।

दुती चंद

भारतीय 100 मीटर धावक दुती चंद
भारतीय 100 मीटर धावक दुती चंद

भारत की मौजूदा 100 मीटर की श्रेष्ठ चैंपियन धावक दुती चन्द का जन्म 3 फरवरी 1996 को ओड़िशा में हुआ था। दुती चंद ने 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स के 100 और 200 मीटर की प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता था। वहीं दुती ने 2014 में एशियन जूनियर एथलीट चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था। दुती चंद भारत की ऐसी पहली महिला धावक हैं जिन्होंने 2019 में इटली में हुए यूनिवरसेड क्लोकिंग के 100 मीटर की रेस में गोल्ड मेडल जीता था।

ट्राइबल समुदाय से आनेवाले और भी खिलाड़ी हैं, जो आज राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन हमनें इन कुछ खिलाड़ियों का नाम ही इसलिए चुना है क्योंकि इन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अपने अपने खेल की विधा में अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम बनाया है और युवाओं के रोल मॉडल के तौर पर उभरे हैं।

आपको सिर्फ इन खिलाड़ियों की सफलता ही नहीं देखनी चाहिए बल्कि इनके जीवन के संघर्षों को भी बहुत ही बारीकी से अध्ययन करना चाहिए तभी आप यह जान पाएंगे कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विषम क्यों न हो अगर आप में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो आपके सपने जरूर सच होते हैं।

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Pankaj Kumar

स्वतंत्र लेखक

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