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जब 37 साल पहले अंग्रेजों की धरती पर लहराया तिरंगा, पूरी दुनिया ने माना था भारत का लोहा

       
नई दिल्ली- 24 जून 1983 से पहले 1975 और 1979 में दो बार विश्व कप खेले जा चुके थे और दोनों बार वेस्टइंडीज की टीम ने खिताब पर कब्जा जमाया था। 1983 के विश्व कप में भी सितारों से सजी वेस्टइंडीज टीम खतरनाक फॉर्म में थी और विपक्षी टीमों को पटखनी दे रही थी। कैरिबियाई टीम शानदार प्रदर्शन कर फाइनल में जगह बना चुकी थी और उसके सामने भारतीय टीम थी, जिसे वेस्टइंडीज के सामने काफी कमजोर माना जा रहा था। टूर्नामेंट में भारत अपना पहला लीग मैच वेस्टइंडीज से हार भी चुकी थी, लेकिन इस बार किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और नतीजा क्रिकेट पंडितों की सोच के बिल्कुल अलग आया था। लॉ स्कोरिंग मैच में वेस्टइंडीज टीम का लगातार तीसरी बार विश्व कप जीतने का ख्वाब टूट चुका था और दो बार की विश्व विजेता को हराकर भारत पहली बार विश्व विजेता बन चुका था। 

कैरिबायाई आक्रमण के आगे ढेर हुई भारतीय टीम

बता दें कि क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉडर्स में खेले गए इस मुकाबले में वेस्टइंडीज कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, क्योंकि कैरिबियाई टीम के गेंदबाज अपनी गेंदों से आग उलग रहे थ और फाइनल में भी ऐसा ही हुआ। वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने अपने कप्तान के फैसले को सही साबित करते हुए भारतीय टीम को 183 रनों पर समेट दिया। भारतीय टीम वेस्टइंडीज आक्रमण के सामने पूरे ओवर भी नहीं खेल पाई और 54.4 ओवर में 183 रन बनाकर ढेर हो गई। भारत के लिए सबसे ज्यादा रन श्रीकंता(38) बनाए थे। उनके अलावा संदीप पाटिल(27) और मोहिंदर अमरनाथ(26) का योगदान दिया था।

भारतीय गेंदबाजों का करिश्माई प्रदर्शन

भारतीय टीम के 183 रनों पर सिमट जाने के बाद हर कोई यही उम्मीद लगाए बैठा था कि वेस्टइंडीज को तीसरी बार विश्व कप विजेता बनने से कोई नहीॆ रोक सकता, लेकिन भारतीय फैंस किसी करिश्मे की उम्मीद कर रहे थे। भारतीय गेंदबाजों ने फैंस की उम्मीद पर खरा उतरते हुए ऐसा करिश्माई प्रदर्शन करा, जिससे हर कोई हैरान रह गया।  भारत ने लिए मदन लाल और मोहिंदर अमरनाथ ने तीन-तीन विकेट झटककर वेस्टइंडीज की कमर तोड़ दी और पूरी टीम 140 रनों पर पवेलियन लौट गई। वेस्टइंडीज के लिए विव रिचडर्स (33) और जेफ डुजोन(25) से सबसे ज्यादा दिया था। गेंजबाजों के दम पर 43 रन से मैच जीतक भारत ने पहली बार विश्व विजेता बन चुका था, भारत दुनिया में अपना दम दिखा चुका था, भारत दुनिया की मजबूत टीमों में गिना जाने लगा था।

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