क्रिकेट

अलविदा क्राइसिस मैन: ट्रॉफी हाथ में लिए कपिल देव की तस्वीर याद है, लेकिन यशपाल शर्मा की जुझारू पारियां यादों में धुंधली पड़ गई!

नई दिल्ली: कहा जाता है कि हमारे देश में क्रिकेट को धर्म की तरह माना जाता है, घर-घर में क्रिकेट की दीवानगी लोगों के सिर चढ़कर बोलती है। लेकिन आज यानी मंगलवार को भारत के पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा के निधन से क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। आज इस लेख के जरिए हम यशपाल शर्मा को श्रद्धांजलि देने की एक छोटी सी कोशिश करेंगे, तो मैं 1983 में जाने से पहले 1999 की चर्चा करना चाहूंगा। दरअसल, हमारे घर में भी क्रिकेट की दीवानगी सब लोगों के सिर चढ़कर बोलती है। विश्व कप 1999 का फाइनल मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच खेला जा रहा था और जहां तक मुझे याद है मैं काफी छोटा था, शायद पहला मैच है, जिसकी धुंधली-धुंधली यादें मेरे दिमाग में बसी है, इससे पहले कोई मैच मैंने देखा भी या नहीं मुझे कुछ याद नहीं है। 

यशपाल ने भारतीय टीम को संजीवनी दी

तो इस मैच में पाकिस्तान की हार लगभग नजर आने लगी थी, स्टीव वा ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी कर रहे थे और ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया को दूसरी बार विश्व विजेता बनाने का काम आसानी से कर दिया था। विश्व कप का फाइनल मुकाबला चल रहा हो और बात विश्व कप 1983 की ना हो, ये तो संभव नहीं है। ऑस्ट्रेलिया की जीत और पाकिस्तान की हार तय होने के बीच जब बात 1983 की होना शुरू हुई तो कपिल देव और सुनील गावस्कर के बाद तीसरा नाम यशपाल शर्मा को सुनाई दिया, ये पहला मौका था जब मैने यशपाल शर्मा के नाम को सुना था। और बड़ों की बात-बात में पता चला कि 1983 के हीरो कपिल देव तो थे ही, लेकिन यशपाल शर्मा और बाकी खिलाड़ियों ने भी पहला विश्व कप जीताने में जीतोड़ मेहनत की थी। तब मुझे अपने ताऊ जी के मुंह से पहली बार सुनने को मिला की जब-जब भारत मुश्किल में था, तब कई मौकों पर यशपाल ने भारतीय टीम को संजीवनी दी। शायद मीडिया में कप्तान के जितना क्रेडिट बाकी खिलाड़ियों को नहीं मिलता, लेकिन मेहनत, लगन और जोश बाकी खिलाड़ियों का भी कम नहीं रहता। तो अब बात विश्व कप में यशपाल शर्मा के प्रदर्शन की….

जब यशपाल बने थे प्लेयर ऑफ द मैच


1983 में वेस्टइंडीज को फाइनल मुकाबले में हराकर भारत विश्व विजेता बना था, यह तो पूरा देश जानता है, लेकिन विश्व कप में जीत की शुरूआत भी भारत ने वेस्टइंडीज जैसी ही मजबूत टीम को हराकर की थी, ये बात शायद ज्यादा लोग नहीं जानते होंगे। 9 जून, 1983 को भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला मैच खेल रही थी, भारतीय टीम दुनिया की सबसे खतरनाक गेंदबाजी आक्रमण के सामने पहले बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरी थी। सुनील गावस्कर, मोहिंदर अमरनाथ, संदीप पाटिल और कपिल देव जैसे खिलाड़ियों के बल्ले से ज्यादा रन नहीं निकले, टीम मुश्किल में भी फिर मध्य क्रम में बल्लेबाजी करने उतरे यशपाल शर्मा ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 120 गेंदों में 89 बना डाले, शर्मा की इस जुझारू पारी का इंडीज के गेंदबाज होल्डिंग ने अंत किया। शर्मा की पारी के दम पर भारत ने 262 रन स्कोरबोर्ड पर लगा डाले, जिसे वेस्टइंडीज हासिल नहीं कर पाई और मुकाबला हार गई। यशपाल शर्मा को इस बेहतरीन पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था।


दूसरे मुकाबले में जीत दिला कपिल देव के साथ नॉट आउट लौटे थे शर्मा


11 जून, 1983 को भारत का दूसरा मुकाबला जिम्बाब्वे से था और इस मुकाबले को भारत ने आसानी से अपने नाम कर लिया था। इस मुकाबले में यशपाल शर्मा ने 19 गेंदों में 18 रन बनाए थे। कपिल देव के साथ टीम को जीत हासिल कराकर नाबाद लौटे थे यशपाल शर्मा।


तीसरे मैच में रहे फ्लॉप


13 जून, 1983 को भारत का तीसरा मुकाबला ऑस्ट्रेलियाई टीम से था, दो जीत के बाद भारत की निगाहें जीत की हैट्रिक पर टीकी थी, लेकिन शुरूआत के दो मैच हार चुकी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इस मुकाबले में भारत को बड़ें अंतर से मात दी थी। ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही फ्लॉप हो गई थी। इस मुकाबले में यशपाल शर्मा का प्रदर्शन भी निराशाजनक ही रहा, उनके बल्ले से मात्र 3 ही रन निकले।


20 जून, 1983 को विस्फोटक पारी


20 जून, 1983 को भारतीय टीम के सामने एक फिर बार ऑस्ट्रेलियाई टीम थी। पिछले मैच में मिली हारका बदला लेते हुए भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 118 रनों से हराया, इस मैच में यशपाल शर्मा ने 40 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी, यशपाल शर्मा ने 40 गेंदों पर 40 रनों की पारी खेली थी।

सेमीफाइनल में गरजे यशपाल


पूरी दुनिया को चौंकाते हुए भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुंच चुकी थी, सेमीफाइनल में भारतीय टीम का मुकाबला मेजबान इंग्लैंड से था। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 213 रन बनाए थे, इस लक्ष्य को भारत ने 32 गेंद शेष रहते हुए ही हासिल कर लिया था। इस मैच में एक बार फिर यशपाल शर्मा के बल्ले ने अपना जलवा बिखेरा था, यशपाल ने 143 मिनट बल्लेबाजी करते हुए 115 गेंदों पर 61 रनों की मैच जीताऊ पारी खेली थी।

फाइनल में दिया था 11 रनों का योगदान


लॉडर्स का मैदान, कपिल देव के हाथों में ट्रॉफी और झूमता हुआ पूरा देश… 25 जून, 1983 को कोई भी भारतवासी नहीं भूला सकता, इस दिन भारत का डंका पूरी दुनिया में बजा था। भारत ने वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्व कप पर कब्जा जमाया था। 13, जून 2021 को यशपाल शर्मा हम सबको छोड़कर चले गए, लेकिन 25 जून, 1983 को वो भी लॉर्डस में मौजूद थे और बाकी खिलाड़ियों के साथ मिलकर टीम को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।यशपाल ने फाइनल मुकाबले में एक चौका जमाते हुए 11 रनों की पारी खेली थी।


1983 के हीरो को अलविदा


यशपाल शर्मा का मंगलवार को हृदयघात के चलते निधन हो गया, 66 साल की उम्र में यशपाल शर्मा ने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बड़े लोगों ने शोक जताया। यशपाल आज भले ही हमारे बीच में न हो, लेकिन हर देशवासी और क्रिकेट प्रेमी की यादों में 1983 के हीरो बनकर हमेशा मौजूद रहेंगे।

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