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भारतीय क्रिकेट को जीत की आदत लगाने वाले नायक का नाम है…..धोनी

धोनी ….धोनी…. धोनी..!!!!!!

अब इस नाम की गूंज अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में सुनने को नहीं मिलेगी। क्योंकि भारतीय क्रिकेट के सभी सपनों, अरमानों को पूरा करने वाले देश के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है।

अपने फैसलों से हमेशा सभी को चौंकाने वाले धोनी ने संन्यास के वक़्त भी देश और दुनिया को चौंकाया। जब हिंदुस्तान और पूरी दुनिया में फैले हिंदुस्तानी देश की आज़ादी के 74 वें वर्षगांठ के जश्न में डूबे थे तभी शाम में धोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह घोषणा कर दी कि “दुनिया अब उन्हें एक रिटायर्ड क्रिकेटर समझे“।

धोनी के लिए यह लिखना कितना आसान या मुश्किल रहा होगा ये तो वो ही जानते हैं लेकिन उनके रिटायर हो जाने की ख़बर को पढ़ना या सुनना देश के क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद भावुक और मायूस कर देने वाला लम्हा था।

धोनी के संन्यास की ख़बर सोशल मीडिया पर वैसे ही फैली जैसे तूफान मिनटों में हज़ारों मील की यात्रा कर लेता है। हर जगह सिर्फ धोनी ही धोनी दिख रहे थे और दिख रहा था कि हिंदुस्तान की जनता अपने माही को कितना प्यार करती है। क्या आम क्या खास ऐसा लग रहा था जैसे सभी कुछ पल के लिए धोनी को जी लेना चाहते हैं।

धोनी के लिए जुनून की हद तक दिखने वाला ये प्यार यूँ ही नहीं है। इसके पीछे है धोनी का कठिन परिश्रम जिसमें देश के लिए किसी भी कीमत पर जीत ही एकमात्र विकल्प था। ऐसा नहीं है कि भारत धोनी से पहले जीतता नहीं था लेकिन धोनी ने भारतीय क्रिकेट में यह विश्वास भरा की परिस्थितियां चाहे कुछ भी हों , अंत में जीत हमारी ही होगी।

राँची जैसे छोटे से शहर से निकले मजबूत कदकाठी, शांत लेकिन तेज दिमाग़ और कभी हार ना मानने वाले मन के राजा इस लड़के ने देश को अनेकों बार एक साथ हँसने और जश्न मनाने के मौके दिए।

2007 का टी-20 विश्व कप, 2011 का एकदिवसीय विश्वकप, 2013 की आईसीसी चैम्पियन ट्रॉफी , एशिया कप (2010, 2016) ये वो मौके हैं जब धोनी ने अपने बेजोड़ कप्तानी और धमाकेदार बल्लेबाजी से भारत को विश्व क्रिकेट का बादशाह बना दिया था। टेस्ट क्रिकेट में भी हम विश्व की श्रेष्ठ टीम बने।

इन उपलब्धियों के अलावा भी धोनी के पंद्रह वर्ष लम्बे क्रिकेट करियर में अनेकों ऐसे मौके आए जब लग रहा था कि भारत हार जाएगा तब धोनी ने वन मैन आर्मी की तरह कभी ताबड़तोड़ छक्के लगाकर तो कभी विकेट के पीछे सेकेंड से भी कम समय में गिल्ली उड़ाकर मैच को भारत की झोली में डाल दिया। धोनी के इन कारनामों पर मुहावरे बने कि “अनहोनी को होनी कर दे उसका नाम है धोनी”। खैर , अब ये सारे मौके युवा क्रिकेटरों के लिए केस स्टडी की तरह काम आएंगे।

भारतीय टीम को जीत की आदत लगाने वाले धोनी ने 2004 से 2019 के बीच 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी-20 खेले। एकदिवसीय क्रिकेट में उनके नाम 10 हज़ार से ज्यादा रन हैं। वे दुनिया के बेहतरीन कप्तान , बल्लेबाज होने के साथ साथ श्रेष्ठ विकेटकीपर भी रहे हैं।

धोनी का जीवन भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा है। धोनी ने दिखाया कि आप भले ही छोटे शहर से हों लेकिन अगर आपके सपने बड़े हैं और उन्हें पूरा करने का जुनून आप में है तो आप महानता के शिखर पर होंगे। भारतीय क्रिकेट में अबतक सैकड़ों चमकदार खिलाड़ी आए लेकिन जहां धोनी हैं वहां कोई और नहीं।

अब जबकि धोनी ने संन्यास ले लिया है तो हम उन्हें फिर कभी भारत के लिए खेलते हुए नहीं देख पाएंगे लेकिन अब जब भी भारत मैदान पर उतरेगा तो मैच की हर मुश्किल घड़ी में धोनी याद आएंगे, कम गेंदों पर बहुत ज्यादा रन बनाना हो तो हेलीकॉप्टर शॉट वाले धोनी याद आएंगे, विकेट के पीछे गेंद मिस होगी तो बिजली जैसी तेजी से बल्लेबाज की गिल्लियां बिखेड़ने वाले धोनी याद आएंगे और डीआरएस के वक़्त बॉस की तरह अम्पायर से भी ज्यादा सटीक फैसला देने वाले धोनी याद आएंगे।

धोनी को उनकी दूसरी पारी के लिए बेपनाह मुहब्बत और आने वाले आईपीएल के लिए शुभकामनाएं।

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Pankaj Kumar

स्वतंत्र लेखक

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